Akhil Bhartiya Digamber Jain Yuvak - Yuvakti Parichay Sammelen Bhopal
 


परिचय-सम्मेलन में भाग ले रहे प्रत्याषियोंतथा
अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देष

      अपने दायित्वो का निर्वाहन करते हुये विगत वर्षौ से लगातार देश-विदेश के सबसे बडे एवं सर्वाधिक परिणाम देने वाले प्रथम परिचय सम्मेलन का आयोजन करती आ रही है। समिति अपने समाज सेवा के उद्देश्य को पूर्ण करने की दिशा में वर्ष दर वर्ष नये-नये आयामों की संरचना करते हुए निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इसकी सफलता इसी बात से स्पष्ट होती है कि वर्ष 2004 में परिचय पुस्तिका ‘जैन मिलन’ में 1204 प्रविष्टिय़ॉ सम्मलित हुई थी जिनकी संख्या लगातार बढ़ते-बढ़ते वर्ष 2011 में 2900 हो गई थी अब वर्ष 2012 में 5000 प्रविष्टिय़ॉ अनुमानित हैं। समिति के इस आयोजन ने न केवल मध्यप्रदेष में अपनी पहचान स्थापित की हैं अपितु पूरे देश-विदेश में भी निवासरत स्वजातीय बन्धुओं को अपनी ओर आकर्शित किया है। समिति को वर्ष-प्रतिवर्ष सकल जैन समाज का स्नेह एवं आर्शिवाद उत्तरोत्तर रूप से बढता ही जा रहा है यह हमारी प्रतिवर्ष बढ़ रही प्रविश्टियों की संख्या से भी प्रकट होता है। समिति के समस्त कार्यकर्त्ता गौरव मिश्रित हर्ष का उपभोग कर रहे हैं एवं समाज के प्रति अंतरंग हृदय से आभारी हैं।

      वैसे तो आजकल पूरे प्रदेश में ही परिचय सम्मेलनों की बाढ़ आई हुई हैं किन्तु यह परिचय सम्मेलन परिणाम प्रदाता के रूप में भी प्रथम सोपान पर स्थापित हो चुका है हम एक बात ओर स्पष्ट करना चाहते है कि अन्य आयोजनकर्त्ता भी हमारे साथी हैं - प्रति़द्वन्दी नहीं। हमारे लक्ष्य समान है ‘समाज की सेवा’, कार्य करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है, कार्य क्षेत्र भी प्रथक है किन्तु लक्ष्य एक है-

‘‘हर गायक का अपना सुर है- हर सुर की अपनी मादकता,                                 
                                      मन मयूर को उपकृत कर दे- कभी तो इसमें सार्थकता’’

      हम एक विषेश तथ्य समाज के सामने रखना चाहते है कि इस सम्मेलन की समस्त बचत राशि निर्धन छात्रो को फीस मदद में निर्धन व्यक्तियों की चिकित्सा सहायता एवं टीन शेड दिगम्बर जैन मंदिर भोपालको दान के रूप में व्यय की जाती है तथा भविष्य में भी हम ऐसा करने के लिए क्रत संकल्पित है। इस प्रकार आप हमें सहयोग देकर अप्रत्यक्ष रूप से ज्ञानदान, औषधि दान, का भी पुण्य प्राप्त करते है।

      अब हम समाज की कुछ कडवी सच्चाइयों को आपके सामने रखना चाहते है, इस निवेदन के साथ कि आप सभी श्रेष्ठीगण इस पर विचार करें एंव इसका निदान करने का प्रयास करे -

     आजकल हमारे यहां बेटा बेटियों के विवाह की आयु बढती ही जा रही है। 26-27 वर्ष की आयु तक तो हम उनके वायोडाटा ही प्रकाशित नही करते है इसके बाद 2-3 वर्ष अच्छे चयन हेतु इंतजार करते है हम समझ नही पाते है कि सभी सम्मेलनो में मिलाकर लगभग 6000 युवक एवं 6000 युवतियो के विवरण प्रकाशित होते है। हमारी जिज्ञासा है अभिभावको से कि क्या 6-7 हजार प्रत्याशियों में कोई भी अपकी बहु-दामाद बनने हेतु उपयुक्त नहीं है । आप अपने पुत्र/पुत्रियो के विवाह को टालते रहते है उसके पीछे वास्तविक अपेक्षा क्या ? वैसे भी आपके बेटे -बेटियां

‘‘ हम अपनी बेटी को बहु बनाकर भेजेंगे तो वह,                                         
एक परिवार का वंश चलाऐगी
                                                   और वहु लाऐंगे तो भी वंश वृध्दि होगी । ’’ 

‘‘ ठीक उसी प्रकार समाज की बच्चियां अन्य सम्प्रदाय मे जा रही है,                     
                         तो एक वंश समाप्त होता है, तथा समाज की वृध्दि भी रुकती है । ’’ 

‘‘ अतः हमें परिवार के प्रति चिंतित होकर अपने पुत्र - पुत्रियो के संबंध जैन परिवारो       
                  मे ही सम्पन्न कर समाज और वंश वृध्दि को प्राथमिकता देवें । ’’