Akhil Bhartiya Digamber Jain Yuvak - Yuvakti Parichay Sammelen Bhopal
 
महामंत्रीगण

          प्रति वर्ष दिसम्बर माह में यह परिचय सम्मेलन होता चला आ रहा है, किन्तु खेद का विषय है कि जितना अच्छा परिणाम मिलना चाहिए वह नहीं मिल पाता। केवल एक मेले की भाँति हम लोग यहाँ पर अपने विवाह योग्य बालक एवं बालिकाओं के साथ यहाँ पर आते हैं, या अकेले ही आते हैं और कर्इ साथियों से एवं नये आगन्तुकों से मिलकर वापिस घर चले जाते हैं, हाँ एक बहुत बड़ा फायदा अवश्य होता है कि हमें पत्रिका के माध्यम से बहुत से पते एवं फोन नं. मिल जाते हैं तथा लड़के या लड़की की फोटो द्वारा एक आभास हो जाता है। इस प्रकार हम घर बैठकर अपने बालक, बालिकाओं के लिए उचित सम्बन्ध तलाश करके फोन पर सम्पर्क कर लेते हैं, या पत्र व्यवहार करके एक दूसरे के घर जाकर सम्पर्क करने में सफलता प्राप्त कर लेते हैं। किन्तु इतना ही प्रयास नहीं है, मेरे हिसाब से कम से कम 10 प्रतिशत सम्बन्ध तो एक माह के अन्दर हो ही जाना चाहिए, तब इन परिचय सम्मेलनों का सही फायदा मिल सकेगा। केवल एक ही नहीं, 2 या 3 परिचय सम्मेलन तो सिर्फ भोपाल में ही हो जाते हैं। इसके अलावा इन्दौर, जबलपुर, टीकमगढ़, सागर इत्यादि स्थानों पर भी सम्मेलन होते जा रहे हैं।

उदाहरण :-
          जैसे एक सम्मेलन में यदि लगभग 2000 या इससे अधिक प्रविशिटयाँ आती है, तो 2000 का 10 प्रतिशत अर्थात 200 सम्बंध तो एक माह में हो ही जाना चाहिए तभी सम्मेलन की उपयोगिता मानी जावेगी, किन्तु खेद है कि 1 प्रतिशत याने 20 संबंध भी तय नहीं हो पाते, ऐसे में सम्मेलन की क्या उपयोगिता है? मेरे कहने का तात्पर्य यह कदापि नहीं है कि सम्मेलन न होवें। परिचय सम्मेलन खूब होवें, किन्तु उपयोगिता हम लोग साबित कर सकते हैं, यदि हम चाहें तो। तो क्या हम नहीं चाहते? अवश्य चाहते हैं, किन्तु अपने विचार एवं भावनाओं को पवित्र रखते हुये विचार कीजिए सफलता अवश्य ही आपके कदम चूमेंगी एवं परिचय सम्मेलन का अधिकतम लाभ हमें मिल जायेगा। करना क्या है?

     हमें सर्व प्रथम यह करना है कि जब लड़के या लड़कियाँ स्टेज पर अपना परिचय दे रहे होते हैं, तो उसे ध्यान लगाकर सुनिये एवं देखिये। यदि आपको एक नज़र में लड़का या लड़की पसन्द आ जाता है तो तुरन्त ही उसका नं. नोट कीजिए एवं उनके माँ या पिता से सम्पर्क करने का प्रयास कीजिए। उस समय लेन-देन पर बिल्कुल ही विचार मत कीजिए। प्रत्येक माँ-बाप अपनी लड़की को जो कुछ स्वेच्छा से देना चाहते हैं, वह स्वीकार कीजिए, सम्बन्ध होने में देर नहीं लगेगी। यह मेरे अनुभव की बात है। इसलिये सम्पर्क करके उन महाशय के बारे में अन्य कुछ लोगों से जानकारी लीजिए परन्तु 100 प्रतिशत अवश्य मत कीजिए। क्योंकि कुछ लोग आपके विरोधी भी हो सकते हैं, जो गलत सलाह देकर आपको फंसाने का प्रयास कर सकते हैं। अपनी मन की आवाज से भी परखिये और निर्णय कीजिए, यही अपने बेटा या बेटी से भी पूंछ लीजिए, सम्बन्ध निश्चित ही तय हो ही जावेगा।

उदाहरण :-
          कभी-कभी संयोग ऐसे जुड़ते हैं कि जहाँ आप संबंध करने जा रहे थे, वहाँ कुछ व्यवधान आता है और आपका संबंध कहीं और शीघ्र तय हो जाता है। ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं। हमारे साथ भी दोनों बेटों की शादियों में इस तरह के निमित्त एवं संयोग आये। हमने गम्भीरता से विचार अवश्य किया और सोचा कि जो होता है वह अच्छे के लिए ही होता है। बस इस शुभ विचार ने हमें निर्णय करने पर मजबूर कर दिया और हमारे दोनों बेटे भी मान गये। हमने कभी लेन-देन पर सोचा ही नहीं क्योंकि प्रत्येक मां-बाप अपनी क्षमता के अनुसार देता ही है, परन्तु हाँ यह अवश्य सोचा कि नगद राशि बिल्कुल नहीं लेना है। इस शुभ विचार के आते ही सम्बन्ध तुरन्त ही जुड़ गये और बिना किसी व्यवधान के दोनों बेटों का विवाह हो गया। बड़े बेटे का विवाह 10 मई सन 1995 में तथा छोटे का विवाह 29 जनवरी