Akhil Bhartiya Digamber Jain Yuvak - Yuvakti Parichay Sammelen Bhopal
 
मन की बात

      उच्चशिक्षित है एवं दूर दराज पर अकेले रहकर देश की सेवा कर रहे है ऐसे में उनके भटकने की संभावना रहती है जिसके लिये स्वयं युवक-युवतियो के साथ हम अभिभावक गण भी पूरी तरह से जिम्मेदार है। हमारे समाज के सभी सदस्यो से निवेदन है कि वे अपने पुत्र-दामाद के चयन में मात्र उनके गुण कार्यक्षमता को ही प्राथमिकता दे ना कि अन्य अपेक्षाओ को ।

     हमे समाज में एक अन्य विसंगती भी नजर आ रही है वह है अपनी पुत्रियों के विवाह हेतू महानगरो बडे शहरो के अतिरिक्त अन्य छोटे नगरो के युवक प्रत्याशियो के बारे में उपेक्षा के विचार से प्राय: युवतियां स्वयं भी छोटे नगरो में अपने विवाह से इंकार कर देती है। उनकी नजर में मात्र मेट्रोपोलिटन सिटी ही रहने के लायक है जबकि बडे शहरो में हालत यह है कि सम्भवता: पडौसी भी एक दूसरे से अपरिचित रहते है, एक दूसरो के सुख-दुख में सम्मलित होने के लिये समय भी मुश्किल से निकाल पाते है। आप कितने धनाढय हो को्इ पहचानता नही है पूरा जीवन ही भागदौड एवं संघर्ष में ही व्यतीत होता है। जबकि छोटे शहरो में जीवन प्राय: शांत सौहार्दपूर्ण होता है एवं परस्पर सम्मान की भावना भी ज्यादा रहती है, अभी फिलहाल तो स्थति यह है कि जो उच्च व्यवसाय हेतु बाहर जाते है उनमें से अनेक अन्य सम्प्रदाय में विवाह कर लेते है, एक छोटे नगरो के युवक मजबूरी में ही अन्य समाज में विवाह करने हेतू मजबूर होगे। कृप्या मनन करे चिन्तन करे एवं ऐसा ना होने देने के लिये सकंल्प ले तभी हमारा आपका एवं समाज का भविष्य उज्जवल एवं प्रगतिशील रहेगा। अन्त में सभी स्वजातीय बन्धुओ से अभिवादन कर निवेदन करूंगा कि हमारा आश्य़ किसी भी सम्मानीय को आहत करना नही है यदि किसी सम्मानीय को बुरा लगा हो तो हम सरल ह्रदय से क्षमा चाहते है।

      समिति द्वारा प्रकाशित जैन मिलन पत्रिका समाज के कर कमलो में लोकार्पित है जिससे आप अपना अमूल्य समय बचाकर आपाधापी दौड-धूप वाली जिन्दगी में सरलता से बहु / दामाद का चयन कर सके ।

     इस परिचय सम्मेलन में भारी प्रविष्टिय़ॉ देकर सहभागिता प्रदान कर तथा भोपाल पधारकर दुनिया के इस सबसे बडे एवं स्थापित परिचय सम्मेलन को सफल एवं सार्थक बनाने में आप स्वजातीय बन्धुओ ने जो अमूल्य योगदान दिया है इसके लिये हम अत्यन्त आभारी है ।